Thursday, September 17, 2009

हाल ऐ पत्रकारिता...

आजकल पत्रकारिता एक भद्दे मजाक से बढकर और कुछ नहीं है, टीआरपी का खेल आज के पत्रकारों को अनार्थी शब्दों का इस्तेमाल करने तथा सस्ते मनोरंजन को परोसने में खासी मदद कर रहा है।

मांग और पूर्ति के इस दौर में घटिया पत्रकारिता को भी तरजीह मिली है और कुछ news channel इसे भुनाने में लगे हैं। क्या कभी सोचा था, एक जमाने के प्रसिद्ध टीवी शो 'आप की अदालत' के मेजबान रजत शर्मा इस प्रकार की पत्रकारिता को बढ़ावा देंगे।

एक बच्ची जिसे रेल से गिरने के बाद अपने पिता का नाम तक याद नहीं है, समाचार के अनुसार उसे उसकी माँ उस बच्ची को रेल से फ़ेंक कर चली गई थी, क्या इस समाचार को परोसने का कोई और तरीका नहीं था, "मम्मी मम्मी मौत वाली मम्मी" अभी तक उसकी माता या पिता का कोई अता-पता नहीं है शायद मुद्दा कुछ और ही हो। लेकिन दूसरी और उससे एक पत्रकार अनगिनत सवाल पूछता जाता है, कहाँ है वह डॉक्टर तथा पुलिस प्रशासन जो एक बच्ची की मानसिक स्तिथी को न समझते हुए एक गरम समाचार ढूढने वाले के हाथों में उसे थमा देते है। शायद यह वही लोग है जिन्हें तनख्वाह अथवा कोटे की चिंता ज्यादा है, ऊपर से नीचे तक सभी का स्तर एक सा है।

एक वक्त में कहा जाता था, की मीडिया तथा समाचार पत्र एक सभ्य समाज का आएना होता है, लेकिन आज एक भद्दे मजाक से बढ़कर कुछ नहीं है। हमें अपने स्तर को बढ़ाना होगा अन्यथा हम अपने आने वाली पीढी को जवाब नहीं दे पायेंगे की हमने अपने समाज देश के लिए क्या किया। सफाई अपने घर से ही शुरू करनी होगी, और इस जलती हुई मशाल को भुझने न देने की प्रतिज्ञा लेनी होगी।

अभिनव सारस्वत

Saturday, September 12, 2009

life at own risk...


Rainy season and this bus don't have wiper at drivers side, but there is no other option for an Indian.....

Friday, September 11, 2009

Monday, September 7, 2009

what the hell ! - Bomb











Different views

I think (Delhi)- Its a definitely bomb. broooomm

Divyendu Pratap says (Noida)- Someone left his bag.

Jack gaur (Gurgaon) says - This is just a garbage bag.

Amit (Hyderabad) says - A poor man left his bag.

Alok Rawat (Okhla, Delhi) - Working style of MCD department.

yeeeaaah Alok Rawat is right.

Bomb-proof dustbins in Delhi for 2010 Games? - what do you people think? please do comments

Wednesday, September 2, 2009

rikshaw wala











अपना रिक्शा चमकाने के लिए, अपने शहर का फुटपाथ गन्दा कर लिया मिलिए इनसे यह भारतीय हैं और इनकी संस्कृति सर्वश्रेष्ठ है तथा संस्कार और इंसानियत से भरपूर है। जय हिंद जय भारत।

These rickshaw drivers are cleaning and coloring the rickshaws, but they didn't noticed what he did, MCD spend a lots of money for cleaning footpath, roads, kachras...........

Tuesday, September 1, 2009

Monday, August 31, 2009

the defenders


Indian security in right hands, what do you think, is it a right guy who can defend a bank, ATM or can help a ATM user........

jai hind